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मेरे लिए

तुम्हारे लिए

तुम्हारे लिए
मैंने तो गढ़ा
एक नया जन्म
एक नई पुकार
और-
सच मानो,
खुद एक_मैं_फकत मैं/

तुम्हारे लिए
फिर से
भटका खयालों में
तड़फा विचारों में- और
ढूँढा तुम्हें उसी शहर में
जहाँ छोड़ चली थी तुम
अपनी साँसे, कुछ यादें
और- सच मानो
मेरी बेवफाई भी।

तुम्हारे लिए
मरा था मैं,
जन्मा था मैं
लेकिन,
तुम जब मिली तो
सच मानो,
इस बार तुमने
की बेवफाई...।

प्रतिक्रियाएँ

Re: मेरे लिए
कहते हैं प्रेम कविता लिखना सबसे आसान है औऱ सबसे कठिन भी। मुझे श्रीनरेश मेहता का एक सस्मरण याद आता है। वे उन दिनों दैनिक चौथा संसार के प्रधान संपादक हुआ करते थे औऱ मैं फीचर पेज देखा करता था। एक दिन बातचीत में उन्होंने यह बात बताई कि एक बार उनकी प्रेम कविताएं पढ़कर किसी ने पूछा कि आप इस उम्र में भी प्रेम कविताएं लिख रहे हैं।वे तब साठ पार कर चुके थे। श्रीनरेश मेहता ने जवाब दिया हां चूंकि इस उम्र में प्रेम नहीं कर सकता इसलिए प्रेम कविताएं लिख रहा हूं। यह उनके सेंस आ़फ ह्यूमर का उदाहरण है।
Re: मेरे लिए
वेरी गुड पहली बार पढ़ी ऐसी कविता।
Re: मेरे लिए
आपकी इस कविता में दार्शनिकता है। लगता है कि आप पीछले जन्म में ज्यादा विश्वास करते है। कविता बहुत ही अच्छी लीखी। उसका अंत प्रभावित कर गया
अस्वीकरण