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ब्लॉग्स (40)
भारत एक ऐसा शक्तिशाली राष्ट्र है जिस पर मूर्ख गीदड़ राज करते हैं। इन ‍गीदड़ों के लिए लिखने में कोई भलाई नहीं इनके साथ वहीं करना चाहिए जो बंदूक की गोली करती है। यदि ये गीदड़ ज्यादा समय तक सत्ता में बने रहेंगे तो पूरे राष्ट्र को गीदड़ों का धर्म अपनाना ... आगे पढ़ें...

आशुतोष को सलामअपने पिता के निधन के बाद ढाबा मालिक से मनोरंजन चैनल एमटीवी के कार्यक्रम एमटीवी रोडीज के विजेता बनने के बाद आशुतोष कौशिक ने कलर के बिग बॉस के विजेता बनने के बाद जता ही दिया कि आखिर दम है सरल, सौम्य और मस्त सच्चाई में। अब बॉलीवुड में उनके जाने ... आगे पढ़ें...

अभिज्ञात जो बहस में हर बार मुझसे हारने के बाद कहते थे कि तुमने तर्कशास्त्र पढ़कर जीवन में बहुत बड़ी भूल कर ली, और कभी-कभार जब मैं हार जाता था तो कहता था कि मार्क्सवादी कुतर्क का ही सहारा क्यों लेते हैं? हालाँकि यह शख्स मुझे कभी पसंद नहीं आया लेकिन उनकी ... आगे पढ़ें...

नमक की दो डलियाँआपस में बातें कर रही थी किकितना गहरा है समुंदर....पहली ने कहा-चलो इसकी तह में चलेंदूसरे ने कहा-चलो छलाँग लगाओ।और सच मानो...मैं उन्ही के इंतजार में यहाँ लेटा हुआ हूँ किवे आकर मुझे बताएँ कि आखिर कितना गहरा है समुंदर। आगे पढ़ें...

अभी तकमेरे शब्द रोते थेसच मानों, मैं नहीं/आजपहली बारमैं रोया हूँ........0।0इसलिए किआईने को आज ही साफ किया है////साभार : रचना आगे पढ़ें...

मेरे भीतर है एक समुद्रऔर सच...कहूँमैं उसमें डूबा जा रहा हूँजबकिचाहता हूँ मैं तुम्हें डुबोना....मेरी कविता मेरा समुद्र से अंशसाभार...जाना है उस पार आगे पढ़ें...

अभी मैंनेआकाश कहा ही था किमछली ने पूछाकिसे कहते हैं आकाश?कुछ देर तकमेरी आँखेशून्य में कुछ खोजती रहीफिर मैंने कहा किजो शून्य है उसे कहते हैं आकाश/मछली नेफिर खड़ा किया प्रश्न किकिसे कहते हैं शून्य?मैंने सोचाइस तरहा तो बातआगे बढ़ती ही जाएगी/तबउसे मैंने जल ... आगे पढ़ें...

कल रातदेखा मैंने एक स्वप्न किमंदिर में जाकर मैंनेमूर्तियों की जगह खड़ी कर दी कविताएँ/फिर गया मसजिदऔर, उन्हें पढ़ने लगा नमाज की तरह-जागकर, ढूँढने लगा माँ को,जो जानती है,सपनों को सच्ची करने का टोटका/साभार : साक्षात्कार आगे पढ़ें...

कुछ कहूँइससे पहले हीएक समझदार चुपमुझे चुप कर देती है/चीखना चाहता हूँ मैंसमूचे कागजों पर..लेकिनदरख्त याद आते हैं मुझे/दौड़ना चाहता हूँपूरे समय चक्र में...लेकिनकुछ ठहरी हुई साँसे याद आती है/भुलना चाहता हूँसमूची याद में...लेकिनकोई याद करता है मुझे/शायदउस पार ... आगे पढ़ें...

मैंने टैक्सी चला रहे टैक्सी ड्राइवर के कंधे पर हाथ रखकर कहा- ओय! इधर किधर ले जा रहे हो मुझे तो अपने घर नवलखा जाना है। इधर तो....वह भयानक तरह से चमक गया। एकदम से टैक्सी रोक दी। मैं भी सोच में पड़ गया कि आखिर इसे अचानक क्या हुआ।उसने पसीना पोंछते हुए कहा- ... आगे पढ़ें...

जेतवन में बु‍द्ध के प्रवचन चलते थे तो प्रवचन के दौरान एक व्यक्ति बार-बार सो जाता था। बुद्ध पूछते-भंते क्या सो रहे हो?नहीं भगवन किसने कहाथोड़ी देर बाद भंते फिर सो गए तब बुद्ध ने फिर पूछा...भंते क्या सो रहे हो?नहीं भगवन किसने कहातीसरी बार भंते फिर सो गए तब ... आगे पढ़ें...

Osho Lao Tzu library, Poona. Osho in his precious library which gradually took over his whole residence. Its a corridor library, holding some 100.000 volumes making it the worlds largest private library. In Bombay and Poona 1970-1981 Osho was reading ten ... आगे पढ़ें...

क्या कहा मित्रवर्ण! वैशाली की नगरवधू साध्वी है?- मैंने कुतुहलवश प्रति प्रश्न किया।हाँ प्रद्युन! तुम्हें नहीं मालूम। वैशाली, वत्स, कोसल, काशी और मगध साम्राज्य के सभी नगरवासी उसे यूँ ही बदनाम करते रहते हैं, जबकि वह तो श्रमणों के श्रावक संघ में ध्यान और तप ... आगे पढ़ें...

बहुत उपर और उपरतुम्हारेधर्म, राष्ट्र और भाषा की पहुँच से भी उपरनीचे देखा विहंगम दृष्य के बीच मैंनेमनुष्यों का कोलाहल/मैं नहीं पूछूगाँ तुमसे किक्यों काट दिया गया वह वृक्ष जोमेरा एकमात्र घर था/हाँ, नहीं पूछूगाँ तुमसे किउन जंगलों का क्या हुआ जहाँहम सामूहिक ... आगे पढ़ें...

बहुत उपर और उपरनीचे देखता हूँ विहंगम दृष्यमनुष्य जाति का कोलाहल/नीचे प्यार है, सपने हैऔर है-गलाकाट अंधी दौड़।लेकिन उपर!सच मानो,उपर सिर्फ मैं हूँपूरा का पूरा मैं, हाँ शुद्ध मैंआकाश है मेरे जैसाहवा है मेरे जैसी औरईश्वर भी मेरे जैसामुझमें खुला हुआऔर सच मानों ... आगे पढ़ें...

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